किशनगंज जिले में विशेष भूमि सर्वेक्षण के तहत 3 नवंबर को आयोजित ग्राम सभाओं में रैयतों की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी। जिला प्रशासन द्वारा सभी प्रखंडों के ग्राम पंचायतों में विशेष शिविर लगाए गए, जहां सैकड़ों की संख्या में भूमिधारक अपने पुराने खतियान, वंशावली और स्व-घोषणा पत्र जमा कराने पहुंचे। सुबह से ही ग्राम सभा भवनों और सरकारी विद्यालयों में लोगों की कतारें लग गईं, और प्रशासनिक अधिकारियों ने व्यवस्थित ढंग से दस्तावेज संग्रहण का कार्य शुरू किया।
जिला भूमि सर्वेक्षण कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस विशेष सर्वेक्षण का उद्देश्य भूमि संबंधी विवादों को कम करना और प्रत्येक रैयत को उनके वास्तविक भूमि अधिकारों से अवगत कराना है। अधिकारियों ने बताया कि पुराने खतियान (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स), वंशावली (वंशवृक्ष) और स्व-घोषणा पत्र के माध्यम से भूमि के स्वामित्व का सत्यापन किया जाएगा। इस प्रक्रिया से उन लोगों को लाभ होगा जिनके पास भूमि के प्रामाणिक दस्तावेज नहीं हैं या जिनकी भूमि का रिकॉर्ड पुराना है।
ग्राम सभा स्तर पर लगाए गए शिविरों में राजस्व कर्मचारी, अंचलाधिकारी, और सर्वेक्षण टीम के सदस्य मौजूद रहे। उन्होंने रैयतों से प्राप्त दस्तावेजों की जांच की और आवश्यक सत्यापन के बाद उन्हें पंजीकृत किया। कई ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्षों से भूमि विवाद से परेशान थे, और इस सर्वेक्षण से उन्हें न्याय की उम्मीद है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र रैयत इस प्रक्रिया से वंचित नहीं रहेगा, और सभी दस्तावेजों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा।
किशनगंज के जिलाधिकारी ने बताया कि विशेष भूमि सर्वेक्षण राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इसे पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने मूल दस्तावेजों के साथ शिविरों में पहुंचें और सही जानकारी दें। सर्वेक्षण टीम ने कुछ स्थानों पर ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी शुरू की, जिससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिली। अधिकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में और अधिक शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक रैयत लाभान्वित हो सकें।
स्थानीय लोगों में इस पहल को लेकर उत्साह देखा गया। कई रैयतों ने कहा कि पहले भूमि संबंधी कागजात बनवाने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब सरकारी शिविर से राहत मिली है। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि दिव्यांग, वृद्ध और महिलाओं के लिए अलग कतार की व्यवस्था हो। कुल मिलाकर, 3 नवंबर का दिन किशनगंज के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल साबित हुआ, जिससे भूमि सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाया गया।