किशनगंज जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने 3 नवंबर को मक्का उत्पादक किसानों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य फॉल आर्मीवार्म (Spodoptera frugiperda) कीट के प्रभावी नियंत्रण और मक्का की उन्नत वैज्ञानिक खेती पद्धतियों के बारे में किसानों को जागरूक करना था। कार्यक्रम में क्षेत्र के दर्जनों प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया और कीट प्रबंधन तथा फसल सुधार की तकनीकों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने फॉल आर्मीवार्म की पहचान, इसके जीवन चक्र और फसल पर इसके प्रभाव को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि यह कीट मक्का की पत्तियों और भुट्टों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है, जिससे उत्पादन में 20 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। वैज्ञानिकों ने एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) के तहत जैविक और रासायनिक उपायों का संतुलित उपयोग, फेरोमोन ट्रैप की स्थापना, और कीटनाशकों के सुरक्षित छिड़काव की सलाह दी।
प्रशिक्षण में मक्का की उन्नत किस्मों, बीज उपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, और जल संरक्षण तकनीकों पर भी चर्चा की गई। किसानों को दलहन-अनाज फसल चक्र अपनाने, खेत में स्वच्छता बनाए रखने और कीट निगरानी के लिए नियमित निरीक्षण करने की सलाह दी गई। इसके अलावा, मौसम आधारित सिंचाई और ड्रिप सिंचाई के लाभों से भी अवगत कराया गया, जिससे पानी की बचत के साथ-साथ उपज में वृद्धि हो सके।
कार्यशाला के दौरान किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और कीट प्रकोप से जुड़ी समस्याओं पर वैज्ञानिकों से प्रश्न पूछे। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसान नवीनतम तकनीकों से लैस हो सकें और जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ते कीट खतरों का सामना कर सकें। उन्होंने किसानों को सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला को किसानों ने अत्यंत उपयोगी बताया और इसे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि शिक्षा के प्रसार की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रदान की गई जानकारी से किसानों को फॉल आर्मीवार्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अपनी फसल को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी, जिससे क्षेत्र में मक्का उत्पादन को स्थिरता और लाभप्रदता सुनिश्चित हो सके।