किशनगंज जिले में दीपावली और छठ पर्व को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। खासकर कुम्हार टोली में मिट्टी के दीये और बर्तनों की मांग तेजी से बढ़ी है। 2 नवंबर को कुम्हारों के चाक ने पूरी रफ्तार पकड़ ली है, क्योंकि त्योहारी सीजन में दीयों की खपत अधिक होती है। स्थानीय कुम्हार परिवार सुबह से देर रात तक मिट्टी के दीये, पूजा के बर्तन और छठ पूजा के सामान बनाने में जुटे हैं।
किशनगंज के कुम्हार टोली निवासी रामेश्वर प्रजापति ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में प्लास्टिक और चीनी दीयों का चलन बढ़ा था, लेकिन इस बार स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों के जागरूकता अभियान से मिट्टी के दीयों की मांग फिर से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि एक कुम्हार परिवार रोजाना लगभग 500 से 700 दीये बना रहा है, जिससे उन्हें त्योहार से पहले कुछ आमदनी हो रही है।
व्यापारियों के अनुसार, बाजार में मिट्टी के दीयों की कीमत 20 रुपये से 50 रुपये प्रति दर्जन तक है, जबकि सजावटी दीयों की कीमत अधिक है। छठ पूजा के लिए मिट्टी के सूप, टोकरी और दीयों की भी अच्छी मांग है। किशनगंज के मुख्य बाजारों में अस्थायी दुकानें सज चुकी हैं, जहां कुम्हार अपने उत्पाद बेच रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन ने कुम्हारों को सीमित रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कुछ स्थानों पर विशेष स्टॉल लगाने की अनुमति दी है। इससे कुम्हारों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने में मदद मिल रही है। हालांकि, कुम्हारों का कहना है कि मिट्टी और रंग की कीमतों में बढ़ोतरी से मुनाफा सीमित हो रहा है, लेकिन त्योहारी मांग से कुछ राहत जरूर मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी के दीयों के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय शिल्पकारों को आर्थिक सहायता मिलती है। किशनगंज में इस बार दीपावली और छठ पर्व पर मिट्टी के उत्पादों की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 30-40 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। कुम्हार परिवार इस मांग से उत्साहित हैं और त्योहारी सीजन में अच्छी कमाई की आस लगाए बैठे हैं।